Sunday, August 14, 2022

सिंचाई कि उन्नत तकनीक – सिंचाई (Irrigation) क्या है |

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irrigation

सिंचाई (Irrigation) फसलों के लिए बहुत ही उपयोगी होता है इसके बिना फसल से उत्पादन लेना संभव नहीं है हमारी फसलों को समय-समय पर पानी की जरूरत होती है इसके लिए सिंचाई की आवश्यकता होती है | किसान भाई सिंचाई करने के लिए अनेक प्रकार के उन्नत तकनीक का प्रयोग करते है | जैसे – सतही सिंचाई प्रणाली,कुएं एवं नलकूप,तालाब,नहर से सिचाई,सतही सिंचाई प्रणाली,फव्वारा सिंचाई,टपक (ड्रिप) सिंचाई प्रणाली आदि से फसलों कि सिचाई करते है |

इन सभी सिचाई प्रणाली के मदद से नियमित अंतराल पर पेङ-पौधों को पानी की आपूर्ति होती है। जिससे की फसलों को उगाने के लिए,फसलों कि वृद्धि-विकाश के लिए मिट्टी को पानी कि आवश्यकता होती है | और इस आवश्यकता को पूर्ति करने के लिए सतही सिंचाई प्रणाली,कुएं एवं नलकूप,तालाब,नहर से सिचाई,सतही सिंचाई प्रणाली,फव्वारा सिंचाई,टपक (ड्रिप) सिंचाई प्रणाली आदि का प्रयोग करके फसलों की सिचाई करते है |


सिंचाई क्या है  [ What is irrigation ]

सिंचाई (Irrigation) एक ऐसी पद्धति है जिसमे कि फसलों को नियमित मात्रा और नियमित समय अंतराल पर पानी की पूर्ति करना ही सिंचाई कहलाता है | सिंचाई  करने पर जितना पेङ-पौधों को पानी की आवश्यकता होती है उतनी ही मात्रा मे पानी दी जाती है | फसलों को नियमित समय अंतराल पर पानी की आवश्यकता होती है जिसको पूरा करने के लिए सिंचाई  कि आवश्यकता होती है | हमारी खेतों की भूमि को प्रकृति या कृत्रिम रूप से जल देना ही सिंचाई कहलाता है |


सिंचाई की विधियाँ [ Methods of irrigation ]

सिंचाई की प्रमुख्य विधि निम्नलिखित है |

  • चेक बेसिन सिंचाई विधि 
  • बोर्डर सिंचाई विधि 
  • कुंड सिंचाई विधि 
  • स्प्रिंकलर (बौछारी) सिंचाई विधि
  • ड्रिप सिंचाई विधि

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चेक बेसिन सिंचाई विधि [Check basin irrigation method]

इस सिंचाई (Irrigation) विधि का प्रयोग ऐसे फसलों के लिए किया जाता है जिसमे की पौधे पास-पास लगे होते है जैसे – गेहू,बाजरा,सरसों,मूंगफली,मूंग,उङद आदि मे इस विधि का प्रयोग ज्यादातर किया जाता है | यह विधि समतल भूमि के लिए ज्यादा उपयोगी होता है क्योकि अगर भूमि समतल होगा तो हमारे खेतों मे पानी का जल जमाव नहीं होगा | जिसके फलस्वरूप हमारी फसलों को किसी भी प्रकार का नुकशान नहीं होगा | जिससे की हमारी उत्पादन अच्छी होगी | यह विधि छोटे-छोटे टूकङो मे विभाजित खेतों के लिए अच्छी मानी जाती है |


बोर्डर सिंचाई विधि [Boarder irrigation method]

इस सिंचाई (Irrigation) विधि चेक बेसिन सिंचाई विधि से कुछ हद तक अलग है | यह विधि ढालुऑ खेतों के लिए ज्यादा उपयुक्त मानी जाती है इस विधि मे लम्बाई में ढाल की दिशा की ओर कई पट्टियों में विभाजित कर लिया जाता है । इसके बाद पानी कि स्त्रोत को खेत के ऊँचे छोर पर रखा जाता है | तथा पानी के बहाव हेतु पट्टियों को ढालाव की दिशा कि ओर बनाई जाती है | इस विधि मे खेत की टुकङो की लंबाई ढाल की दिशा मे होती है | जब पानी खेत के एक टूकङे मे हो जाता है तब इस स्थिति मे पानी को दूसरे टूकङे की ओर मोङ दि जाती है | और यही क्रिया तब तक चलती रहती है जब तक की पूरी खेत की सिंचाई (Irrigation) न हो जाए | यह विधि चेक बेसिन सिंचाई विधि कि अपेक्षा इसमे कम श्रमिक होते है |


कुंड सिंचाई विधि [ Furrow irrigation method ]

Furrow irrigation
Furrow irrigation

यह सिंचाई विधि अत्यंत उत्तम कारगर तथा सहजता से अपनाने जाने वाली सिंचाई विधि है | इस विधि मे जल का बेहतर उपयोग होता है  यह विधि दूर-दूर पर लगाए जाने वाले फसलों के लिए अच्छी मानी जाती है | यह विधि इन सभी फसलों जैसे – मक्का,गन्ना,आलू आदि के लिए उपयुक्त मानी जाती है | कुछ फसलों मे पौधे के गिरने से बचाने के लिए उसे मेङ तथा नाली बनाकर इसकी रोपाई की जाती है | इन नालियों का उपयोग सिंचाई (Irrigation) करने के लिए उपयोग मे लाया जाता है | इन नालियों के समूह के टूकङे इस प्रकार से बनए जाते है कि इसमे 5-6 क्यारियों के जल की धार अंदर ही अंदर सभी नालियों के क्यारियों तक पहुच जाए | इस विधि मे जब एक क्यारियों मे जल प्रवेश कर जाए तब इस स्थिति मे जल की धारा को दूसरे क्यारियों मे मोङ दि जाती है | और ये क्रिया तब तक होती जब तक की हमारी पूरी खेत मे सिंचाई न हो जाए | इस विधि मे जल की बचत होती है |


स्प्रिंकलर (बौछारी) सिंचाई विधि [ Sprinkler (shower) irrigation method ]

Sprinkler (shower) irrigation method
Sprinkler (shower) irrigation method

यह सिंचाई करने का आधुनिक तरीका है इस विधि मे छिद्र युक्त नालियों से जल को प्रवाहित कराया जाता है | ये छिद्र युक्त नालियों से वर्षा की तरह जल की फुहारें छोङती है | जब आवश्यकता के अनुसार हमारी पौधों को जल की प्राप्ति हो जाती है तब इस स्थिति मे Sprinkler Set को बंद कर दिया जाता है | इस विधि मे जल की बर्बादी नहीं होती है | क्योंकि जितना जल की हमारी पौधों को जरूरत होती है उतना ही हम अपनी खेतो मे जल डालते है | इस विधि मे Sprinkler Set को समय-समय पर मरम्मत की जरूरत पङती है जिसमे की ज्यादा खर्च भी नहीं आता है | Sprinkler (shower) irrigation method मे Sprinkler Set को एक जगह से दूसरी जगह ले जा सकते है इसका मतलब ये है की अगर हमारी पहली खेत मे सिंचाई हो गई हो तब इसको हम दूसरी खेत मे इसको लगाकर उसमे भी सिचाई कर सकते है |


ड्रिप सिंचाई विधि [ Drip irrigation method ]

ड्रिप सिंचाई
Drip irrigation method

यह सिंचाई (Irrigation) करने का आधुनिक तरीका है यह विधि Sprinkler (shower) irrigation method से भी ज्यादा उपयोगी माना जाता है | इसमे पानी का अधिक बेहतर उपयोग होता है | इस विधि मे पानी पौधों तक बूंदों मे पहुचता है | इसलिए इस विधि को ड्रिप सिंचाई विधि (Drip irrigation method) कहते है | इस विधि मे जल का प्रवाह पाइप के द्वारा किया जाता है | यह पाइप छोटे-छोटे छिद्र युक्त होते है | इस पाइप को पेङ-पौधों के जङो के पास लगाया जाता है जिससे की बूंद-बूंद करके पानी पेङ-पौधों के जङो के पास टपकता है इस विधि का ज्यादातर प्रयोग साग-सब्जियों, फूलों,औषधिय,फलदार पेड़ों की सिंचाई आदि मे इसका प्रयोग किया जाता है | इस विधि का ज्यातर उपयोग पॉलीहाउस (Polyhouse) मे किया जाता है | इस विधि से नियंत्रित मात्रा में पानी, उर्वरक प्रभावी ढंग से प्रयोग किये जा सकते हैं । इस विधि मे आवश्यकता आनुसार पानी का बहाव को खोला या बंद किया जा सकता है | Drip irrigation method का प्रयोग ज्यादातर उच्च मूल्य वाले उत्पादों मे ही इसका प्रयोग किया जाता है |


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