Wednesday, May 25, 2022

स्प्रिंकलर (Sprinkler) क्या है ? बौछारी सिंचाई की विशेषताएँ और लाभ

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Sprinkler (shower) irrigation method
Sprinkler (shower) irrigation method

स्प्रिंकलर (Sprinkler) सिंचाई पद्धति ड्रिप सिंचाई पद्धति की तरह ही कार्य करती है | बस अंतर सिर्फ इतना है की ड्रिप सिंचाई मे पेङ-पौधे के जङो के पास पानी बूँद-बूँद  करके गिरता है लेकिन बौछारी सिंचाई मे जल महीन बूँदों मे बदलकर वर्षा की फुहार की तरह पेङे-पौधा पर गिरता है | स्प्रिंकलर को उचित दूरीऔर उचित अंतराल पर लगाया जाता है | स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति में मुख्य भाग पम्प, मुख्य नली, बगल की नली,पम्प फिल्टर, फर्टिलाइजर टैंक,पानी उठाने वाली नली एवं पानी छिड़कने वाला फुहारा आदि का होता है। इनकी सहायता से ही पूरी स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति कार्य करती है | स्प्रिंकलर का पानी छिड़कने वाला नॉजिल हमेशा घूंमता रहता है जिससे की उसके आस-पास की फसलों की पौधें पर वर्षा की तरह बूंदे पड़ती है। जिससे हमारी फसलों की सिंचाई होती है | Sprinkler Set को एक जगह से दूसरी जगह तक ले जा सकते है इसका मतलब ये है की अगर हमारी पहली खेत मे सिंचाई हो गई हो तब इसको हम दूसरी खेत मे इसको लगाकर उसमे भी सिचाई कर सकते है |


स्प्रिंकलर सिंचाई क्या है ? [ What is sprinkler irrigation ? ]

इस सिंचाई पद्धति मे जल को वर्षा की बूंदे की तरह पेङ-पौधों पर छीङकाव किया जाता है इसलिए इस सिंचाई पद्धति को स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति या बौछारी सिंचाई पद्धति कहते है | इस सिंचाई पद्धति मे पाइप की नली में जल का दबाव के साथ पम्प द्वारा भेजा जाता है जिससे फसल पर फुहारा द्वारा छिड़काव होता है। यह सिंचाई करने का आधुनिक तरीका है इस विधि मे छिद्र युक्त नालियों से जल को प्रवाहित कराया जाता है | ये छिद्र युक्त नालियों से वर्षा की तरह जल की फुहारें छोङती है | जिससे हमारी फसलों की सिंचाई होती है |


बौछारी सिंचाई की विशेषताएँ [ Characteristics of sprinkler irrigation ]

  • इस सिंचाई पद्धति के मदद से मजदूरों पर होने वाले खर्चों मे कमी आती है |
  • इस तकनीक के मदद से समय के साथ-साथ पानी की भी बचत होती है |
  • आवश्यकता के अनुसार फसलों को हर दिन या एक दिन छोड़कर पानी दिया जाता है |
  • इस सिंचाई पद्धति का उपयोग उबर-खाबर जमीन और कम पानी की उपलब्धता वाले क्षेत्र मे इस सिंचाई तकनीक का उपयोग कर सकते है |
  • यह सिंचाई करने का आधुनिक यंत्र है तथा इसका उपयोग करना भी काफी आसान है |
  • इस तकनीक के मदद से कम समय मे ज्यादा खेत की सिंचाई कर सकते है |
  • इस तकनीक मे जल को वर्षा की बूंदे की तरह पेङ-पौधों पर छीङकाव किया जाता है जिससे पेङ-पौधों की पत्तीया साफ रहती है तथा पत्तीयों को भोजन बनाने मे आसानी होती है इससे पेङ-पौधों का वृद्धि-विकाश अच्छी तरह से होती है |
  • छिटकावाँ विधि से बोई गई फसलों मे भी इस तकनीक का उपयोग काफी अच्छा माना जाता है |

sprinkler irrigation
sprinkler irrigation

बौछारी सिंचाई से लाभ [ Benefits from sprinkler irrigation ]

  • जल को वर्षा की बूंदे की तरह पेङ-पौधों पर छीङकाव किया जाता है तो भूमि पर जल जमाव नहीं होता है जिससे मिट्टी की पानी सोखने की दर की अपेक्षा छिड़काव कम होने से पानी के बहने से हानि नहीं होती है। इससे पानी की बर्बादी नहीं होती है |
  • जहा पर जमीन की भूमि ऊंची-नीची या उबर-खाबर रहती है वहॉ पर सतही सिंचाई संभव नहीं हो पाती उन जगहों पर बौछारी सिंचाई विधि काफी उपयोगी मानी जाती  है |
  • यह सिंचाई पद्धति अधिक ढाल वाली तथा ऊंची-नीची या उबर-खाबर जगहों के लिए सर्वोत्तम विधि मानी जाती है |
  • इस विधि से सिंचाई करने पर मिट्टी की नमी बनी रहती है जिसके फलस्वरूप हमारी फसल की वृद्धि,उपज और गुणवत्ता अच्छी रहती है |
  • बौछारी सिंचाई पद्धति से जल के साथ घुलनशील उर्वरक, कीटनाशी तथा जीवनाशी या खरपतवारनाशी दवाओं का भी प्रयोग आसानी से किया जा सकता है।
  • Sprinkler Set को एक जगह से दूसरी जगह तक ले जा सकते है इसका मतलब ये है की अगर हमारी पहली खेत मे सिंचाई हो गई हो तब इसको हम दूसरी खेत मे इसको लगाकर उसमे भी सिचाई कर सकते है |
  • इस सिचाई पद्धति के मदद से फसल को आवश्यकता के अनुसार हर दिन या एक दिन छोड़कर पानी दिया जाता है | जिससे फसलो के वृद्धि-विकाश मे बहुत मदद मिलती है | जिससे की हमारी फसल अच्छी होती है |
  • इस तकनीक की मदद से पानी की ही नहीं बल्कि मजदूरी, समय और पैसे आदि की भी बचत होती है |

निष्‍कर्ष [ Conclusions ]

इससे यही निष्कर्ष निकलता है की स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति या बौछारी सिंचाई पद्धति हमारे वातावरण के लिए बहुत ही उपयोगी है क्योंकि इससे हमारी पानी की ही नहीं बल्कि मजदूरी, समय और पैसे आदि की भी बचत होती है जो की हमारे लिए काफी फायदेमंद है | और इस सिंचाई पद्धति के मदद से हमारी उत्पादकता मे भी बढ़ोतरी होती है।


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